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संपादक

सरकार कर वसूल करती है, मालिक नोट कमाता है और मजदूरों की जान चली जाती है
 
भाकपा-माले ने मनाया लेनिन की जयंती और पार्टी स्थापना दिवस
 
कोई धर्म किसी के धर्म को बुरा कहने की इजाजत नहीं देता
 
युद्ध कोई लड़े, वह हमारे विरुद्ध है
 
उपजा द्वारा "नए भारत का नया मीडिया" विषय पर पत्रकार संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन
नया भारत ही नए मीडिया का निर्माण कर रहा है: वाई विमला प्रति कुलपति, सीसीएसयू वैश्विक बाजार के इस दौर में पत्रकारिता को नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा : अरुण कुमार सिंह, डिप्टी कमिश्नर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी लोकतंत्र को मजबूत बनाने में चौथे स्तंभ की प्रखर भूमिका में पत्रकारिता रही : शिवानंद पांडे, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी मेरठ एवं सहारनपुर मंडल
 
आग केवल जलाती नहीं रिश्ते जोड़ती है। शीत ऋतु की आग में जीवन होता, भाईचारा होता। शीत की गहराई मशीन नहीं प्रकृति बताती है। पहले सेंटीग्रेड नहीं था पर ठिठुरते पशु पक्षी ताप बता देते थे
आग केवल जलाती नहीं रिश्ते जोड़ती है। शीत ऋतु की आग में जीवन होता, भाईचारा होता। शीत की गहराई मशीन नहीं प्रकृति बताती है। पहले सेंटीग्रेड नहीं था पर ठिठुरते पशु पक्षी ताप बता देते थे। बूढे बरगद को सब याद रहता था.. किसी का जन्म, किसी की मृत्यु तय करती, किस वर्ष शीत लहरी कितने दिन चली। शीत लहर आती लेकिन जिंदगी चलती रहती उसी शान से। यह शान थी आग। कोयल के बोलते समय ही अलाव जल जाते थे। धुएँ की चादर गाँव पर तन जाती, घने कुहरे से लड़ता धुआँ बस्ती का आकाश दीप था।
 
आग केवल जलाती नहीं रिश्ते जोड़ती है। शीत ऋतु की आग में जीवन होता, भाईचारा होता। शीत की गहराई मशीन नहीं प्रकृति बताती है। पहले सेंटीग्रेड नहीं था पर ठिठुरते पशु पक्षी ताप बता देते थे
आग केवल जलाती नहीं रिश्ते जोड़ती है। शीत ऋतु की आग में जीवन होता, भाईचारा होता। शीत की गहराई मशीन नहीं प्रकृति बताती है। पहले सेंटीग्रेड नहीं था पर ठिठुरते पशु पक्षी ताप बता देते थे। बूढे बरगद को सब याद रहता था.. किसी का जन्म, किसी की मृत्यु तय करती, किस वर्ष शीत लहरी कितने दिन चली। शीत लहर आती लेकिन जिंदगी चलती रहती उसी शान से। यह शान थी आग। कोयल के बोलते समय ही अलाव जल जाते थे। धुएँ की चादर गाँव पर तन जाती, घने कुहरे से लड़ता धुआँ बस्ती का आकाश दीप था।
 
2022 में ज्यादा समय, धन व ऊर्जा कैसे हासिल हो
नया साल दस्तक देने वाला है। जाता हुआ साल बड़ा अजीबोगरीब रहा। सभी का जीवन अस्त व्यस्त कर गया। कुछ छीन ले गया, कुछ सिखा गया। परंतु, कई तरह के अफसोस भी छोड़ गया। जीवन पहले जैसा नहीं रहा। कुछ तो कोविड महामारी के कारण और कुछ सोशल मीडिया तथा इंटरनेट के कारण। कुछ काम आसान हुए हैं, तो बहुत कुछ कीमत भी चुकानी पड़ी है। मोबाइल और सोशल मीडिया लोगों को जितना करीब लाया है, उतना ही इसने अपनों से दूर भी कर दिया है। अब रिश्तों में पहले जैसी गर्माहट नहीं रही। हम सबको जीवन में एक निश्चित मात्रा में समय, ऊर्जा और धन मिला है। जो है उसका अधिकतक उपयोग कैसे किया जाये और जो नहीं है उसे पाया कैसे जाये, यह एक बड़ी चुनौती है, जिससे हर कोई जूझ रहा है। ऐसे में, बाजार और मीडिया है जो लगातार उन चीजों में उलझाए रखता है, जिनकी हमें आपको जरूरत ही नहीं है।
 
अखिलेश यादव पर हमला करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्हें अपना नाम बदलकर अखिलेश अली जिन्ना रख लेना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। भाजपा और मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग भी तेज होते जा रही है।