02/06/2023  :  19:51 HH:MM
संगठित लूट का पर्याय बन गयी है आईबीसी :कांग्रेस
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 à¤¨à¤¯à¥€ दिल्ली- कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार देश में बैंकिंग क्षेत्र में बड़ी सुधार के नाम पर कुछ साल पहले जिस दिवाला और ऋण शोधन संहिता-आईबीसी को लेकर आई थी उसका इस्तेमाल संगठित लूट के तौर पर किया जा रहा है।


कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी सरकार आठ साल पहले इस कानून को लेकर आई तो दावे किए गए कि इससे बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधार होंगे लेकिन इसका इस्तेमाल बैंकों की लूट के रूप में किया जा रहा है और बैंकों से लिया गया कर्ज़ का 80 फीसद से ज्यादा कर्ज़ संहिता के इस्तेमाल से डूब रहा है।

उन्होंने कहा, "इससे देश में दूसरी ऑर्गनाइज्ड लूट हुई है। वित्त वर्ष 2016-2023 के बीच जितने मामले दिवाला और ऋण शोधन संहिता-आईबीसी में गए, उनमें से मात्र 17.6 प्रतिशत की वसूली हुई और बाकी 82.4 प्रतिशत पैसा डूब गया। इसके इस्तेमाल से 75 प्रतिशत मामलों में कम्पनियां औने पौने दाम में बिकी। इसका मतलब यह हुआ कि इस अवधि में जितना पैसा बैंकों से कंपनियों ने ऋण के रूप में लिया उसका 83 फीसदी डूब गया।"

प्रवक्ता ने कहा कि 2016 में जब यह संहिता लाई गई थी तो इसे क्रांतिकारी कदम बताते हुए इसके लिए तालियां पीटी गई थीं और इसे मोदी सरकार का बैंकिंग क्षेत्र में सुधार का बहुत बड़ा कदम बताया गया था। तब दावा किया गया था कि इस सुधार से बैंको की रिकवरी बढ़ेगी लेकिन आठ साल में वसूली 17.6 प्रतिशत ही रही और बैंकों से लूट का सिलसिला शुरु हो गया। संहिता से आम धारणा बन गई कि बैंक से पैसा लो, डिफाल्ट करो और जब पैसा नहीं चुकाने की शिकायत लेकर बैंक आईबीसी जाएं तो ऋण का कुछ पैसा लौटा दो और फिर सारा मामला खत्म।"

उन्होंने कहा कि अडानी ग्रुप ने आईबीसी का खूब उपयोग किया है। इसका इस्तेमाल करते हुए उसने औने-पौने दाम में पोर्ट और पॉवर कंपनियों को खरीदा। इस काम के लिए उसने कराईकल पोर्ट, कोरबा वेस्ट पावर प्लांट और एसआर पावर जैसी कई कंपनियों का इस्तेमाल किया और बैकों को संहिता के तहत खूब चूना लगाया। सवाल है कि आईबी संहिता को संगठित लूट के लिए लाया गया था।






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